गाजियाबाद / सुल्तानपुरगाजियाबाद के पुलिस थानों में जनता की सुनवाई किस तरह होती है, इसका अंदाजा इस मामले से लगाया जा सकता है। एक युवक की सड़क हादसे में मौत के 80 दिन बाद भी पुलिस FIR दर्ज नहीं कर सकी, जिससे पीड़ित परिवार गहरे सदमे और परेशानी में है।
क्या है पूरा मामला?
सुल्तानपुर जिले के धम्मौर थाना क्षेत्र के कचानाया गांव निवासी आशीष तिवारी (28 वर्ष) गाजियाबाद के लोहामंडी क्षेत्र में ट्रैक्टर चलाकर अपना जीवनयापन करते थे। उनकी शादी तय हो चुकी थी और मार्च में शादी होने वाली थी।लेकिन 5 जनवरी 2026 की रात करीब 2 बजे, कोतवाली थाना क्षेत्र में सिल्वर सिटी सिनेमा के पास उनका ट्रैक्टर डिवाइडर से टकराकर पलट गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर अगले दिन परिजनों को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद भी मामले में कोई कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
पिता की गुहार, लेकिन नहीं लिखी गई FIR मृतक के पिता रामजी तिवारी का आरोप है कि उन्होंने कोतवाली थाने में लिखित तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने आज तक FIR दर्ज नहीं की।
👉 उनका कहना है:“मैं 700 किलोमीटर दूर सुल्तानपुर से गाजियाबाद आता हूं”“रोज थाने के चक्कर काटता हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती”“मुंशी और दरोगा कहते हैं कि केस मत कराओ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही क्लेम मिल जाएगा”
पुलिस पर गंभीर आरोप
पीड़ित पिता का कहना है कि पुलिस उन्हें लगातार टाल रही है और केस दर्ज करने से बच रही है।
💬 “मेरा बेटा चला गया, अब मैं ही परेशान हो रहा हूं। 2000 रुपये खर्च करके यहां आता हूं, मजदूर आदमी हूं… कब तक चक्कर लगाऊं?” 80 दिन बीत गए, न्याय अब भी दूरहादसे को 80 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो FIR दर्ज हुई और न ही जांच शुरू हुई।
👮♂️ पुलिस का क्या कहना है?कोतवाली थाना SHO सचिन कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर पीड़ित की मदद की जाएगी।
बड़ा सवाल
👉 जब पुलिस खुद घायल को अस्पताल लेकर गई थी, तो फिर FIR दर्ज करने में इतनी देरी क्यों?
👉 क्या गरीब और मजदूर परिवारों को न्याय के लिए यूं ही भटकना पड़ेगा?
📢 निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। जरूरत है कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को समय पर न्याय मिल सके।
