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बिना कारण वाहन जब्त करने पर दरोगा पर 10 हजार का जुर्माना, हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना किसी अपराध या कानूनी आधार के एक वाहन को महीनों तक अपनी कस्टडी में रखने पर तत्कालीन उप-निरीक्षक सुनील कुमार पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही वाहन को तत्काल छोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जुर्माने की यह राशि संबंधित दरोगा के वेतन से काटी जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकलपीठ ने सुधांशु की याचिका पर दिया है।

जौनपुर निवासी याची का ऑटो (यूपी 62 बीटी 5203) केराकत थाना पुलिस ने 16 जुलाई 2025 को जब्त किया था। याची ने ऑटो को छोड़ने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची ने दलील दी कि उसने वाहन के स्वामित्व से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने वाहन नहीं छोड़ा।

आरोप था कि पुलिस ने कहा कि बिना अदालती आदेश के वाहन को रिलीज नहीं किया जा सकता। वहीं, पुलिस की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कोई भी मालिक बनकर वाहन लेने नहीं आया। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह स्वीकार किया है कि उक्त वाहन किसी भी आपराधिक मामले में शामिल नहीं पाया गया था।

ऐसे में पुलिस वाहन को बिना किसी ठोस वजह के अभिरक्षा में नहीं रख सकती। जब मालिक दस्तावेज दिखा रहा था तो पुलिस को अपनी संतुष्टि के बाद वाहन छोड़ देना चाहिए था। कोर्ट ने इसे पुलिस की शक्तियों का दुरुपयोग मानते हुए याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी है कि वह वाहन को अनावश्यक रूप से पुलिस अभिरक्षा में रखने के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों से हर्जाने का दावा कर सकता है।