मथुरा जिले में एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब चलते-चलते एक स्कूल बस अचानक आग का गोला बन गई। बरेली हाईवे पर हुई इस घटना में बस में सवार करीब एक दर्जन मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ गई थी। हालांकि, समय रहते एक दरोगा की सूझबूझ और बहादुरी ने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बताया जा रहा है कि बलदेव पब्लिक स्कूल की बस बच्चों को लेकर जा रही थी, तभी अचानक उसके इंजन से धुआं उठने लगा। कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप ले लिया और बस लपटों में घिरने लगी। बच्चों में चीख-पुकार मच गई और स्थिति बेहद भयावह हो गई।इसी दौरान वीआईपी ड्यूटी से लौट रहे मांट थाने के उपनिरीक्षक (एसआई) सतेंद्र सिंह की नजर बस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत खतरे को भांप लिया और बिना समय गंवाए अपनी गाड़ी बस के आगे लगाकर उसे रुकवाया। इसके बाद उन्होंने फौरन बस का दरवाजा खुलवाया और अंदर फंसे घबराए बच्चों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला।जैसे ही सभी बच्चे बस से नीचे उतरे, आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते बस धू-धू कर जलने लगी।
अगर थोड़ी भी देर हो जाती, तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बस का अधिकांश हिस्सा जल चुका था। सूचना मिलते ही बच्चों के परिजन भी मौके पर पहुंच गए और अपने बच्चों को सुरक्षित देखकर राहत की सांस ली।दरोगा सतेंद्र सिंह की बहादुरी और तत्परता की हर ओर सराहना हो रही है। उन्होंने देवदूत बनकर न सिर्फ बच्चों की जान बचाई, बल्कि एक बड़े हादसे को टाल दिया। यह घटना साहस, जिम्मेदारी और मानवता की मिसाल बन गई है।
