नई दिल्ली/प्रयागराज: दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 9 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।
2 सितंबर को हाई कोर्ट ने रद्द की थी NSA हिरासत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था। अदालत ने उनकी हिरासत को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कीं और 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मुआवजे की राशि गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए।
नोएडा DM मेधा रूपम की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका पर भी हाई कोर्ट ने सवाल उठाए। अदालत ने माना कि NSA जैसे कठोर कानून के इस्तेमाल से पहले उपलब्ध सामग्री और पुलिस रिपोर्ट की सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए थी। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में अपनी “नाराजगी” दर्ज करने का भी निर्देश दिया था। अदालत ने अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई
9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी। यह बात मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कही गई। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, मेधा रूपम भी हाई कोर्ट के आदेश को अलग से चुनौती दे सकती हैं।
अप्रैल के नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़ा मामला
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में उनके खिलाफ NSA के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई। हाई कोर्ट ने 2 सितंबर के अपने फैसले में NSA हिरासत को रद्द कर दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से मामले में एक नया कानूनी मोड़ आ गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाता है या उसमें कोई बदलाव होता है।
नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायालयीन आदेशों, सार्वजनिक दस्तावेजों और 9 सितंबर 2026 तक सामने आए विश्वसनीय घटनाक्रम के आधार पर तैयार की गई है। खबर में दी गई जानकारी संबंधित न्यायिक एवं सार्वजनिक रिकॉर्ड पर आधारित है।
